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Community connect

I am the System
Teerath No. 3 has embarked on a steady journey that saw it transform from a shabby, defunct government school with high absenteeism, to a bright, well-maintained school that is a learning space that the children and community believe in.

Intelligent Management – Better Schools
A passionate teacher, Nimai Chand, has turned around unfavourable circumstances with intelligent management and relationship-building to craft his single teacher school into a hub of cooperative and exciting schooling

Swami and his Tribe
TN Swami was an enigmatic man who made a new land his home and took up the cause of education of its marginalized Garasiya tribe. Swami fundamentally altered the tribe’s literacy levels, championing their cause as a mentor and a guardian for young students ensuring that their voices reached the government officials.

Single Teacher school, Batanharra
Of all blocks of Dhamtari district, Nagri is the most backward, most populated by tribals, and covered with forests. The condition of the tribal schools in this remote part of India is in no way different from that of those in many tribal areas of the country.

Catalyzing the empowerment of a community
About 4 kms from Narayanpura, thereisa hamlet.The story goes that a long-bearded man from Joghanbhavi moved here and thereafter the hamlet came to be known as the Gaddada Narayana Thanda, that is,‘long-bearded Narayana’shamlet’.

Expression of feelings about a natural disaster

It was a visit to Bonga Primary School post the natural calamity. This schoolis located in the interiors, along a road that led to Nehru Institute of Mountaineering but bifurcated before reaching NIM.That road was quite narrow and we saw a number ofsprings and brooks along the way. The entire place looked heavenly, yellow flowers “Phulee” were blossoming, which were ornamented with dew drops and each time the rays of sun fell on them, they glittered like small bulbs.


A School with a view!

It was an hour and a half drive from Almorato Lamgada, SatyonSchool.
We drove through the meandering roads, observed trees with fresh green leaves and wild red flowers blossoming. The air was fresh andthe hillocks looked new, after the rains…


Committed teachers make a difference

The GovernmentPrimary School, Hotlu is located around 11kms away from Balotra. It has two teachers including Head Teacher Mr. Iqbal and approximately 60 students.


Learning innovatively in a mountain village

Primary School, Chinakholi is located in the midst of the mountain village of Chinakholi.,5km uphill from the National Highway connecting Rishikesh to Gangotri.The school can be reached by walking or by using a vehicle.


The school even the neighbouring villages envy!

The condition of schools in tribal areas is known to all, but when someone recommends a school in a remote tribal area as a good school, it definitely increases one’s curiosity. But once you reach the school in the tribal village of Pandaripani (Raiyat), one can only agree in pleasant surprise!


स्कूल की कायापलट
‘मोरवन’ मतलब मोरों का वन, ऐसा वन जहॉ मोर रह सकेंया रहते हों । जी हॉ, चित्तैडगढ जिले की डूडंला पंचायत में मोरवन गॉव के लोगों का ऐसा ही कुछ मानना है अपने गॉव के बारे में। गॉव के प्राथमिक विद्यालय को देखकर यकीन हो जाता है कि इस गॉव का यही नाम होना चाहिए।

ये बच्चे ही तो हमारी मूल कमाई हैं..
राजस्थान के टोंक जिले में ब्लॉक उनियारा के गाँव उंकारपुरा ढ़ाणी में मात्र दो ही स्कूल हैं, एक प्राथमिक और एक माध्यमिक और दोनों ही सरकारी स्कूल हैं। एक भी प्राईवेट स्कूल गाँव में नहीं है। 

कोई बच्चा अब ड्रॉप-आउट नहीं होता
संध्या बैस और उनके दूसरे साथी शिक्षक देवनाथ साहू चर्रा गाँव के रहने वाले हैं और गाँव शासकीय नवीन प्राथमिक शाला, चर्रा में ही शिक्षक हैं। इस गाँव की जनसंख्या में “पारधी” जनजाति की बहुलता हैजो मूलतः घुमक्कड़ लोग हैं और परंपरागत रूप से “चिड़ीमार” का काम करते हैं। 

प्राइवेट स्कूल के 30 बच्चों ने शासकीय स्कूल में नाम लिखवाये !
छत्तीसगढ़ में एक स्कूल ऐसा भी है जहां गाँव के लोग स्कूल में आते-जाते हैं, बच्चों की पढाई के बारे में शिक्षकों से बात करते हैं, उनके बच्चे किन विषयों को नहीं समझ पा रहें हैं शिक्षकों को बताते हैं, बात इतनी ही नहीं है, ग्रामवासियों ने अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूलों से कटवा कर 30 बच्चों को इसी विद्यालय में भर्ती करवाया है।
 

उच्च प्राथमिक विद्यालय रौंतल ;उत्तराखंड
उच्च प्राथमिक विद्यालय रौतल उत्तराखंड राज्य में  उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ विकास खंड में स्थित है । गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू बैंड से इस विद्यालय के लिए ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी रोड के जरिये पहुंचा जा सकता है । इस स्थान से विद्यालय कीदूरी लगभग 17 किलोमीटर है। 

बालकों में सुन्दर दिखने की चाह

राजसमंदज़िले के राजसमंदब्लॉकमुख्यालय से करीब 10कि.मी. की दूरी पर स्थित डिप्टी गाँव में एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयहै। जहाँ पर 38 बालिकाओं व 27 बालकों सहित 65 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।


असफलता बनी जिंदगी की राह

राजेश बचपन से पढ़ने में अच्छे थे। जन्म के साथ ही मां-बाप ने उसके सर पर अपनी ख्वाहिशें रख दीं कि बच्चा बड़ा होकर डाॅक्टर बनेगा। बिना कुछ सोचे-समझे राजेश डाॅक्टर बनने की कोशिश में जुटे रहे। लेकिन सफलता आसपास से होकर गुजरती रही। इस असफलता ने उन्हें आईएएस बनने की ओर मोड़ा। फिलाॅसफी और अंग्रेजी में एमए किया और सिविल्स की तैयारी की। चार प्रयास। यहां भी सफलता मुंह चिढ़ाकर बगल से निकलती रही। इस बीच कुछ अच्छी कंपनियों में एमआर बनने का मौका मिला। काम अच्छा चल रहा था लेकिन मन खुश नहीं था। आर्थिक संकट तो दूर हो गया था लेकिन कुछ था जो बेचैन किये था।


बेहतर स्कूल बनने की कहानी...

समुदाय के साथ बेहतर संवाद, काम करने की लगन और कुछ करने के जज़्बे के चलते अवनीश चैहान ने प्राथमिक विद्यालय तीरथ नं. 3 को नई दिशा दी है..


चुनौतियों में काम करनेका भी मजा है...

बागेश्वर जिले में पहाड़ की तलहटी में गरुड़ से पास्तोली मार्ग पर 3 किलोमीटर पक्की सड़क से लगभग 200 मीटर की दूरी पर संचालित चैरसों उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ओर पहाड़ से तो दूसरी तरफ कुछ ही दूरी पर बसे एक छोटे से गांव के किनारे पर स्थित है।


हौसलाहीउड़ानदेताहै...
उधमसिंह नगरसे खटीमा की ओर 60-70 किलोमीटर की यात्रा करनाइसलिए सुखदथाक्योकिहम एक ऐसेशिक्षकसेमिलनेजारहेथेजोकुछअलगहैं। उधमसिंहनगर कीटीमकेदोसदस्य विजय मौर्य एवंदीपकपुरोहितभीसाथहैं।भौगोलिक रूपसे उधमसिंहनगरउत्तराखण्डमेंतलहटी (समतल) काइलाकाहैऔर यह वाकईइतनासमतलहैकिइसकाइतनासमतलपनभीआश्चर्यमेंडालताहै।सड़क के दोनोंतरफ खड़ीगेंहू की लहलहातीसुनहरीबालियां यहां की उपजाऊ धरती के बारेमेंस्वतः हीबतातीहैं।बैसाखीकादिनथा।हमलोग खेत, बगीचों, घुमावदाररास्तोंऔरबैसाखी की रैलीपारकरतेहुए हमनिमाईचंद्रमांझी के स्कूलमेंपहुंचतेहैं।इसस्कूलकोनिमाईचंद्रमाझी कास्कूलकहनाइसलिए लाज़िमीहै, क्योंकि यह स्कूलनिमाईचंद्रमाझी के सपनोंमेंपलताऔरसां



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