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Leadership

I am the System
Teerath No. 3 has embarked on a steady journey that saw it transform from a shabby, defunct government school with high absenteeism, to a bright, well-maintained school that is a learning space that the children and community believe in.

Intelligent Management – Better Schools
A passionate teacher, Nimai Chand, has turned around unfavourable circumstances with intelligent management and relationship-building to craft his single teacher school into a hub of cooperative and exciting schooling

Swami and his Tribe
TN Swami was an enigmatic man who made a new land his home and took up the cause of education of its marginalized Garasiya tribe. Swami fundamentally altered the tribe’s literacy levels, championing their cause as a mentor and a guardian for young students ensuring that their voices reached the government officials.

A School with a view!

It was an hour and a half drive from Almorato Lamgada, SatyonSchool.
We drove through the meandering roads, observed trees with fresh green leaves and wild red flowers blossoming. The air was fresh andthe hillocks looked new, after the rains…


Dynamic teachers hold the key

Primary School Geonla, established in 1912, is one of the oldest schools in Dunda Block. The school is on the premises of the Cluster Resource Centre, Geonla, and is by the side of the road connecting Uttarkashi to Yamunotri.


The sincere effort of a teacher is admired by villagers

“I met the parents personally to break the culture of silence prevailing among the students of our school. I started talking to them in Chhattisgarhi instead of Hindi,and it works” says Sanjay Kumar Patel, a teacher (Shiksha Karmee) of the Government Primary School, Saraitola (B).


A wave of change

It is 8.45 am and children are trickling in to Government Higher Primary School in Chilwadgi(6 km from Kalgeri cluster in Koppaltaluka). They keep their bags in the classrooms and rush to play. Some teachers who have already arrived join them and both get immersed in the game. The bond between children and teachers is evident as they argue over the game and form teams.


Books come out of lock and key ….

This is what the teachers in Honvadatota Higher Primary School in Bijapur district of Karnataka did when they opened the access to books to their students and entrusted them with the responsibility of managing their newly established library. They trusted the students with books, and to their surprise, all books remained intact even after 10 months.
 

Is personality change possible through trainings? ……. A case of KookanpalliSchool Head Teacher

Can a person who is short tempered change through a few sessions of training? Can he/she change to such an extent that his relationship with his/her children changes and he/she becomes a more approachable parent? Can people around him/her start feeling less inhibited and more comfortable? Is personality change possible through trainings?


The Winning Stroke

This is a story of Shri RB Mallikarjun. Head Teacher of KinniSarposTanda Lower Primary School in Kamlapurtaluka of Gulbarga.


एक अच्छे स्कूल के मायने
चितौडगढ़ शहर से करीब १५ किलोमीटर उत्तर में स्थित है मानसिंह जी का खेड़ा गाँव| यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको संकरे, पानी, कीचड़ औरधूल भरे रस्ते से जाना होगा| लेकिन वहां के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को देखकर रास्ते की थकान और परेशानी ख़त्म हो जाती है| 

बच्चों की मुस्कान पर फिदा है हर धड़कन
किसी नेकहा है कि ‘‘तकदीर तो पत्थर की भी बदल सकती है, शर्त यह है कि उन्हें करीने से तराशा जाय’’। ऐसे ही कुछ बाल मन चिंतकों के प्रयासों और कर्म से राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोताड़, स्कूल की बगिया महक रही है।.

तो अब तुम क्या मास्टर बनोगे?
इस सवाल ने जाने कितने लोगों को शिक्षक होने से रोका होगा औरना जाने कितनों के उत्साह पर पानी फेरा होगा. यह हमारे ही देश में होता है किप्राथमिक शिक्षण और शिक्षक के प्रति हमारा नज़रिया उतना गंभीर नहीं है परन्तु बहुत से विकसित देशों में प्राथमिक शिक्षण को ज्यादा जिम्मेदारी भरा और ज्यादा महत्वपूर्ण काममाना जाता है. युवा शिक्षक प्रकाश पांडे जब यह बात कह रहे थे तो उनके भीतर चल रही उथल-पुथल उनके बोले जाने की शैली से समझी जा सकती थी. 

प्रधानाध्यापक की भूमिका से भी बदलता है, विद्यालयों का नक्शा
स्कूल का प्रारम्भ होता है, सभी शिक्षकों (प्रधानाध्यापक सहित) के द्वारा प्रधानाध्यापक कक्ष में स्कूल में प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों की योजना के विमर्ष से। बच्चे आते है। प्रार्थना सभा प्रारम्भ होती है, जिसमें बच्चों सहित सभी शिक्षकों की अपनी-अपनी भागीदारी रहती है। इसके बाद कक्षाओं में शिक्षण कार्य प्रारम्भ होता है। बीच-बीच में प्रधानाध्यापिका  द्वारा किसी-किसी कक्षाओं का अवलोकन किया जाता है। मध्यांतर मेंभी सभी शिक्षक प्रधानाध्यापक कक्ष में बैठकर अभी तक हुए कार्य पर विमर्ष करते हैं। प्रधानाध्यापिका द्वारा अवलोकन की गई कक्षा से जुडी बातों को सभी के साथ साझा किया जाता है। दिन के अन्त में भी सभी शिक्षक मिलकर कल के काम का थोड़ा-थोड़ा खाका बनाने का प्रयास करते हैं।  

एवरेस्ट से ऊंचे इरादों वाली हर्षा
मुश्किलें भला किसकी जिंदगी में नहीं आतीं लेकिन इंसान वो है जो उन मुष्किलों में जिंदगी का हासिल तलाश ले. ताकि जो दिक्कतें उन्हें मिलींहैंवह औरों को न मिलें. दूर तक बीन आये उन राहों पर मिलने वाले वह सारे कांटे जिन पर चलते वक्त पांवों से खून रिसने लगा था...और बिछा दे फूल कि आने वाले राहगीरों का सफरखुशनुमा और यादगार बन जाए. उत्तराखंड की हर्षा रावतएक ऐसा हीनाम है। 

प्रेरणा देते रहिए
धमतरी से लगभग सवा दो घंटे कांकेर की तरफ चलने के बाद एक गाँव आता है मठवाड़ा-मोदी। वैसे तो कांकेर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी लोक कला के लिए चर्चित हैपर यहाँ हम जिनकी चर्चा कर रहे हैं वह कांकेर जिले के माठवारा मोदी गाँव के शासकीय प्राथमिक स्कूल की प्रधान अध्यापिका हैं अनसुइयया जैन। यह स्कूल ना केवल माठवारा मोदी में चर्चित है बल्कि आस-पास के 2-5 किलोमीटर तक बसे गांवो के लोग भी अपने बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। 

कस्तूरबा गॉधी बालिका आवासीय विद्यालय
सागौन और तेंदू के जंगलों के बीच गुजरती उंची- नीची सडक पर लगातार दो घण्टे का सफर तय करके हम चित्तौडगढ शहर से बहुत दूर आ निकले हैं। 

हमनें सीढ़ी–दर सीढ़ी बच्चों को ऊपर चढ़ाया है|
राजकीय प्राथमिक स्कूल भढ़कोट, डुंडा कस्बे से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। गाँव काफी ऊंचाई पर बसा हुआ है और लगभग हर वर्ष यहाँ जाड़ों में बर्फ गिरती है। गाँव की आबादी लगभग हज़ार-बारह सौ घरों की है। 

स्कूल की कायापलट
‘मोरवन’ मतलब मोरों का वन, ऐसा वन जहॉ मोर रह सकेंया रहते हों । जी हॉ, चित्तैडगढ जिले की डूडंला पंचायत में मोरवन गॉव के लोगों का ऐसा ही कुछ मानना है अपने गॉव के बारे में। गॉव के प्राथमिक विद्यालय को देखकर यकीन हो जाता है कि इस गॉव का यही नाम होना चाहिए।

बस, मैं अपना काम कर रही हूं...
राजकीय प्राथमिक विद्यालय डामटा यमुना नदी के किनारे दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर ब्लॉक मुख्यालय नौगांव से 30 किमी दूर दक्षिण में बसा है डामटा कस्बा ।यहां एक शिक्षिका विजया रावत हैं 200 बच्चों को अकेले पढ़ाती हैं ।




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