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Teaching and Classroom Practices

Government Primary School, Gyansu (Purana)
In a district where more than 75% schools have a strength below 40, Primary SchoolGyansu (Purana) is an inspiring school; it has maintained a student strength of above 75 over the years (enrolment in 2013-14: 88; 45 boys and 43 girls). This is especially commendable since the school is in a town where there is a low-fee private school right next to it and many more within a radius of 2 km.
Doing Things Differently, To Do Them Better
Government Madhyamik School, Naglais like any of the thousands of schools in this country…or is it? Read about a school where the enthusiasm and initiatives of the head teachers and teachers are making it an exciting place of quality learning for children.

Catalyzing the empowerment of a community
About 4 kms from Narayanpura, thereisa hamlet.The story goes that a long-bearded man from Joghanbhavi moved here and thereafter the hamlet came to be known as the Gaddada Narayana Thanda, that is,‘long-bearded Narayana’shamlet’.

Government Primary School, Sald
The Government Primary School, Sald, serves a rural-based community. The majority of the population is self-employed as farmers and depends on local agriculture. The school is staffed by a headmistress,Ms Uma Raturi, and one Assistant Teacher, MsPushpaAswal. 61 students (31 boysand 30 girls) are enrolled in this school.Both teachers are highly motivated and promising and are always open to learn new teaching-learning approaches.

Primary School, Dunda Gaon
Primary School Dunda Gaon is no different from any other government school in India. A small two-roomed school with 32 children and two teachers, it is a typical government school whose population is decreasing year after yearas parents of the nearby villageprefer to put their children in English medium private schools in the hope of receiving better education. 

Innovative method of teaching English and mathematics

Primary School Mirgarh is situated a half kilometre from its Nodal Mungthala in Abu Road block of Sirohi district in Rajasthan. This school has two classrooms and another room usually used as a staff room and for keeping materials and records. There is a small play area that has a boundary.


A School with a view!

It was an hour and a half drive from Almorato Lamgada, SatyonSchool.
We drove through the meandering roads, observed trees with fresh green leaves and wild red flowers blossoming. The air was fresh andthe hillocks looked new, after the rains…


Schools that do things differently

The Elephant School, Sarpavaram Village:To begin with, we came to know that the school building here was constructed at a cost of Rs: 1 to 1.5 lakhs. It was interestingto learn that a child-friendly school with attractive features can be built within this budget.


What makes a school special for children?

What transforms the ordinary to extraordinary ? Often, it’s about putting in extra effort..And that is exactly what the Aadarsh Government Primary School, Bhanpuri has done! From the outside, it looks like any other government primary school but once you enter inside,especially the classroom,you realize that this is not an ordinary school.Rather,it is a school where the teachers’ endeavours are clearly visible.


A single-teacher school flourishing with thoughtful pedagogy

The Government Primary School in Bhatwari was established in1915. It has two class-rooms, a kitchen, a library, an office-room, and a small playground.


संजय जगूड़ी -
18 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद, बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच दिखता है एक सुंदर सा गांवपिंगल गांव,यह स्कूल है प्राथमिक विद्यालय पिलंग। ऐसा लगता है जैसे हम किसी दूसरी दुनिया में आ गये हैं। चारों तरफ पसरे मौन को तोड़ती स्कूल में बच्चों की शिक्षक के साथ कविता गाने की आवाज। बच्चे सहजता से कविता के साथ-साथ स्थानीय संदर्भों को जोड़कर समझ बना रहे हैं।

रेखा चमोली
रेखा चमोली प्राथमिक विद्यालय गणेशपुर में सहायक शिक्षिका के रूप मेंकार्यरत हैं और बच्चों के साथ नवाचारी शैक्षिक प्रयोगों के लिए जानी जाती है। स्कूल में बच्चों को पुस्तकालय, परिवेश के साथ शिक्षण का जुड़ाव व बच्चों का गतिविधि कार्नर के लिए आपने विगत वर्षों में बेहतर काम किया है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय रौंतल ;उत्तराखंड
उच्च प्राथमिक विद्यालय रौतल उत्तराखंड राज्य में  उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ विकास खंड में स्थित है । गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू बैंड से इस विद्यालय के लिए ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी रोड के जरिये पहुंचा जा सकता है । इस स्थान से विद्यालय कीदूरी लगभग 17 किलोमीटर है। 

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मालियों का बेरा महिलावास सिवाना
यह विद्यालय ब्लाक मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर स्थित है जो मोकलसर गाँव के निकट है |सड़क मार्ग से यहाँ पर पहुंचा जा सकता है विद्यालय में कुल विद्यार्थियों का नामांकन 183 है जिनमे से 121 छात्राएं एवं 62 छात्र हैं। कुल 11 कमरे हैं जो की अच्छी अवस्था में हैं | एक रसोई घर है जिसमे बच्चों के लिए नियमित रूप से पोषाहार बनाया जाता है | 

शिक्षक अच्छे हों तो शिक्षा की तस्वीर बदल सकती है|
“काम कोई भी करूँ तो जरा हट कर करना चाहता हूँ ” यह जैसे विजय साहू का मूलमंत्र है। और यह हट कर काम करने का अंदाज़ उनके काम को देखने से भी झलकता है। 

सामूहिकता की भावना और विद्यालय विकास
(ग्राम-सिरस निवाई,ब्लॉक- ----- जिला -----------------)राज्य- राजस्थान
राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सिरस निवाई ब्लॉक मुख्यालय से तकरीबन 24 किलोमीटर दूर है। इस गाँव को आमतौर पर सिरस रेल्वे स्टेशन के नाम से जाना जाता है। विद्यालय गॉव केबाहर  है। विद्यालय के परिसर मेंबहुत से छायादार वृक्ष लगे हुए हैं। पानी की मोटर है, साफ-सुथरा रसोईघर है, हवादार कमरे हैं। 

मैं शिक्षा में बहुत अच्छा करता करना चाहता हूँ -अनिल बडोला
’’वर्तमान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसके कई कारण दिखते भी हैं और हर ओर इससे लोग परेशान भी दिखते हैं। जो अच्छा नहीं कर पा रहे हैं उनका चिंतित होना तो स्वाभाविक है लेकिन जो अच्छा कर भी रहे हैं कमोबेश वह भी बहुत उत्साहित नहीं दिखते हैं। 

ये बच्चे ही तो हमारी मूल कमाई हैं..
राजस्थान के टोंक जिले में ब्लॉक उनियारा के गाँव उंकारपुरा ढ़ाणी में मात्र दो ही स्कूल हैं, एक प्राथमिक और एक माध्यमिक और दोनों ही सरकारी स्कूल हैं। एक भी प्राईवेट स्कूल गाँव में नहीं है। 

अक्षय दीक्षित (माह के शिक्षक)
आज अक्षय दीक्षित से मिलना तय हुआ है।स्कूल छतरपुर गांव के पास एक बसाहट राजपुर गाँव का स्कूल है। सड़क से करीब 3-4 किलोमीटर अंदर।स्कूल के भीतर जाते ही एम॰ सी॰ डी॰ स्कूल के बारे मे स्थापित बहुत सी धारणायेँ टूटती हैं। स्कूल का मैदान बहुत बड़ा है। बहुत पुराने और बड़े–बड़े पेड़ है।

स्कूल की कायापलट
‘मोरवन’ मतलब मोरों का वन, ऐसा वन जहॉ मोर रह सकेंया रहते हों । जी हॉ, चित्तैडगढ जिले की डूडंला पंचायत में मोरवन गॉव के लोगों का ऐसा ही कुछ मानना है अपने गॉव के बारे में। गॉव के प्राथमिक विद्यालय को देखकर यकीन हो जाता है कि इस गॉव का यही नाम होना चाहिए।




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