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पाठशाला भीत र बाहर का पहला अंक गए साल बारिश के ऐसे ही मौसम में छपकर आया था और ज्ञान परम्प रा के साथ कदमताल का यह सि लसि ला जारी है। शो ध पत्रिका के प्रस्तुत अंक को अन्ति म रूप देने के इस मसरूफ़ वक्त में बीच–बीच में बारिश ने कहीं मौसम को खुशनुमा बनाया है तो कहीं बाढ़ और तबाही का सि लसि ला पैदा किय ा। इस सबके बीच नए संकल्पों के साथ पत्रिका का यह ती सरा अंक आपके सामने है। यह सुखद है कि पि छले अंकों की तरह इसमें भी बहुत सारे नए लेखकों ने आमद दी है, जोकि इस प्रकाशन का एक बड़ा मक़सद है।