झारखंड में हमारा काम 2007 में शुरू हुआ था
वर्तमान में हम गुमला, राँची सिमडेगा और खूंटी में कार्य कर रहे हैं। हमारे कामकाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अन्य क्षेत्र शामिल हैं।


शिक्षा
हम विभिन्न माध्यमों से शिक्षकों से काम करते हैं। ये माध्यम हैं ब्लॉक और संकुल स्तर कार्यशालाएँ, बाल शोध मेला, वालांटियर शिक्षक फोरम, ग्रीष्म और शीतकालीन शिक्षक कैंप। 2026 से राँची के इटकी ब्लॉक में अज़ीम प्रेमजी स्कूल आरंभ हो रहा है।

6
टीचर लर्निंग सेंटर (टीएलसी) संचालित
1000
आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं के साथ काम
3,500 +
प्रारम्भिक स्कूल शिक्षकों के साथ प्रत्यक्ष काम
700
प्रधान शिक्षकों के साथ काम
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्थापना 2010 में हुई थी। इसका तीसरा कैंपस राँची की सरहद पर इटकी में है। लगभग 150 एकड़ में फैले हुए विश्वविद्यालय कैंपस में एक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज होगा। इसका निर्माण अगले 5-7 वर्षों में चरणबद्ध रूप से होगा। इसके पहले चरण का काम जारी है और जुलाई 2026 तक पूर्ण होगा। इस कैंपस में एमए इन एप्लाइड इकोनॉमिक्स (अनुप्रयुक्त अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर) और एमए इन डेव्लपमेंट ( विकास अध्ययन में स्नातकोत्तर) पहले दो कोर्स शुरू होंगे।
अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप
इस स्कॉलरशिप की शुरुआत 2024 में वंचित पृष्ठभूमि की लड़कियों को कॉलेज शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। ये स्कॉलरशिप अब झारखंड के सभी जिलों में लागू है।
स्वास्थ्य
हमने स्वास्थ्य पर काना काम जनवरी 2024 में आरंभ किया। हमारे फोकस में मातृ एवं शिशु स्वस्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, संक्रामक और असंक्रामक रोग, और परिवार नियोजन है। हमारा लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना और अंतिम व्यक्ति तक सभी आवश्यक सेवाएँ पहुँचाना है
5
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ काम का विस्तार
40
उप स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ काम का विस्तार
3
लाख लोगों तक सेवाओं की पहुँच

क्रेच (शिशु घर )
क्रेच सेवा झारखंड में सितंबर 2023 में आरंभ हुई। इसका उद्देश्य 7 माह से 3 वर्ष के कमजोर बच्चों के पोषण में सुधार लाना है। शिशु घर कहे जाने वाले ये क्रेच शिशुओं को दैनिक देखभाल, ताजा भोजन, आरंभिक प्रोत्साहन, और उनके विकास की निगरानी करते हैं। हम राँची, गुमला, सिमडेगा, खूँटी, पश्चिमी सिंहभूम और पाकुर जिले के 18 विकास खंडों में शिशु घर संचालित कर रहे हैं।
367
सक्रिय शिशु घर
7,500+
शिशु नामांकित
आजीविका
हमारा आजीविका कार्यक्रम 2023 में गुमला और सिमडेगा जिले में सरकार के सहयोग में आरंभ हुआ। हमारा उद्देश्य मध्य क्षेत्र के आदिवासी लोगों की घरेलू आय में बिना जोखिम बढ़ाए टिकाऊ सुधार लाना है।
10
ग्राम पंचायत तक विस्तार
4,900
परिवारों तक पहुँच
12,000
लोगों तक प्रभाव

अन्य कार्य क्षेत्र
अनुदान
हम झारखंड में 113 सहयोगी संस्थानों के साथ काम कर रहे हैं। ये संस्थान बच्चों, संवैधानिक मूल्य, लैंगिक न्याय, अधिकार, भूमि और वन विभाग, वंचित समुदायों, नागरिक समाज संस्थाओं और शहरी इनिशिएटिव आदि मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
हमारे साथ जुड़ें
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दस्तावेज़ में दिये सभी आंकड़े अप्रैल 2025 के हैं, ये हर वर्ष परिवर्तित/ परिवर्धित होते हैं ।
