लघुचित्र, डायरी, वीडियो, बातचीत : इस अनुभाग में बताया गया हर एक काम आपको हमारे और हमारे काम के करीब लाता है। यह हमारे सामने मौजूद चुनौतियाँ बताते हैं, जिन्हें हमने अपने उद्देश्य के करीब आने के लिए पार की हैं
हमारी तीन परिचालन इकाइयाँ हैं – फील्ड संस्थान, फ़िलंथ्रोफ़ी और विश्वविद्यालय। यह तीनों एकजुट तरीके से फ़ाउण्डेशन के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती हैं। एक न्यायसंगत, समतामूलक, मानवीय और सस्टेनबल समाज की दिशा में योगदान देना फ़ाउण्डेशन का उद्देश्य है। हम आपके लिए तीनों इकाइयों से, सीधे भारत भर में हमारे लोगों और भागीदारों से कहानियों का एक संग्रह लाए हैं। कहानियों के इस संग्रह में वीडियो, एनीमेशन, साक्षात्कार और पत्रिकाएँ मौजूद हैं। यह हमारे कार्य के विभिन्न क्षेत्रों में फ़ाउण्डेशन की यात्रा और प्रभाव को प्रदर्शित करती हैं।

बेंगलुरु के बेघरों के लिए गरिमा और उम्मीद
फ्लाई-ओवर और पुलों के नीचे सोते लोग, फ़ुटपाथ पर झुंड में बैठे परिवार, ट्रैफिक सिग्नलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीख मांगते असहाय और बूढ़े लोग; ये सब भारत के मेट्रो शहरों का बेहद आम दृश्य है। ये शहरी बेघर हमारे आस पास ही हैं, लेकिन तेजी से फ़ैलते शहरों में हम उनकी मौजूदगी […]
नक्षत्रगलु एपिसोड 22 | रमन्ना, मागदी, रामनगरा | उमाशंकर पेरियोडी।
जानें कि कैसे रमन्ना ने तीन महीने में छात्रों को अँग्रेजी में पूरे आत्मविशास के साथ वार्तालाप करने में मदद की और कैसे उनके स्कूल में और अधिक छात्र आए।
Nakshatragalu EP 21 | Sudha G, Naubad, Bidar | Umashankar Periodi
Sudha G has worked across three very different schools, each shaping her approach as an educator in unique ways.
नक्षत्रगलु एपिसोड 20 | जयश्री हिरेमत, केंबवी, यादगीर | उमाशंकर पेरियोडी
यादगीर कर्नाटक में जयश्री, जो, नली-कली कक्षाओं के लिए जानी जाती हैं, ने बताया कि बच्चो को कुछ सिखाने से पहले उन्हें समझने और उनसे अर्थपूर्ण संबंध बनाना बहुत ज़रूरी है।
विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र की जुबानी
जानें कि लोकेश मणिकांत ( बी ए मानविकी 2020-23) ने निम्न आय वाले समुदाय के कक्षा पाँच के छात्रों के जीवन में सीखने के प्रति उल्लास और उद्देश्य कैसे पैदा किया
लोक संगीत प्रोजेक्ट में : कक्षाकक्ष की एक सृजनात्मक कथा, अज़ीम प्रेमजी स्कूल, बाड़मेर
क्या हुआ जब छोटे बच्चे लोक संगीतकारों से मिले? जादू
नक्षत्रगळु । भाग 19 । गविकुमार कस्तूरी, कोप्पल | उमाशंकर पेरियोडी
जानें कि कैसे गविकुमार ने अपने स्कूल में सारी आवश्यक सुविधाएं विकसित कीं, कैसे जाति के बंधनों से जूझे और मूलभूत सुविधाओं के आभाव में स्कूल को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक बनाया।
आदिवासी समुदायों में स्वास्थ्य को अहमियत देना: आज के हालात और आगे की राह
आदिवासी समुदायों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ आम नागरिकों से भी कम पहुँच पाती हैं। इस संवाद हिस्सा लेते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भारत के आदिवासी समुदायों के बीच रहकर काम करने के अनुभवों को साझा किया है।
खाना, खेलना और देखभाल: उड़िसा के एक शिशु घर में स्रीमा के साथ एक दिन
इस फिल्म में स्रीमा नज़रिए से अज़ीम प्रेमजी शिशु घर में बिताए गए एक दिन को दिखाया गया है। इसमें हम देख सकते हैं कि किस प्रकार बच्चे शिशु घर में एक सुरक्षित और पोषणयुक्त महौल में अपना दिन बिताते हुए साथ मिलकर खेलते-सीखते और पोषणयुक्त स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
Nakshatragalu EP 18 | Sriyamsh, Kamatagi, Hungunda Taluk | Umashankar Periodi
From setting up an excellent library in his school to organising unique programmes like stargazing, demonstration of the election process, and “homework with parents” to involve both parents and community members, listen to Sriyamsh Kolar’s story.
नक्षत्रगळु । भाग 17 । आनंद चिन्नप्पा, हिडगळी तांडा, विजयपुरा। उमाशंकर पिरियोडी
आनंद ने पढ़ाने को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक जीवंत अनुभव बना दिया। कभी वह भालू नाचने वाले का भेष धरकर बच्चों को चौंका देते, तो कभी उनकी ही भाषा सीखकर उनसे दिल से जुड़ जाते। पढ़ाई उनके लिए खेल भी थी और सीख भी। बीस सालों से चल रही आनंद की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो बच्चों के दिल तक पहुँचे और उन्हें जीवनभर याद रहने वाला सीखने का अनुभव दे।











