बेंगलुरु के बेघरों के लिए गरिमा और उम्मीद

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फ्लाई-ओवर और पुलों के नीचे सोते लोग, फ़ुटपाथ पर झुंड में बैठे परिवार, ट्रैफिक सिग्नलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीख मांगते असहाय और बूढ़े लोग; ये सब भारत के मेट्रो शहरों का बेहद आम दृश्य है।

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बेंगलुरु के एक बस टर्मिनल पर सुस्ताती एक बेघर महिला

नशे की लत और बेघरबारी: एक पुराना दुष्चक्र

नाना भाई एक दिहाड़ी कामगार हैं।

अकबर की कहानी: एक मकसद और वह

प्रवासी मजदूरों के लिए रूटीन स्वास्थ्य कैंप में बलद प्रेशर चेक करते हुए।

झूलन की घर वापसी की राह

ख्याल रखने वाली व्यवस्था - नम्मा कुटुम्बा

इंस्पेक्टर सविता, बसावनगुडी पुलिस स्टेशन, बेंगलुरु

© 2026 अजीम प्रेमजी फाउंडेशन. सर्वाधिकार सुरक्षित।
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