
हम सरकारी स्कूलों से लेकर कई तरह के एनजीओ और सिविल सोसायटी संगठनों के साथ भागीदारी में तक काम करते हैं। हमारा काम हमारे लक्ष्य और नज़रिए को और भी आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहता है।

हम सभी को आसानी से मिलने वाला और मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम बनाना चाहते हैं।

ग्रांट्स और कला व संस्कृति के क्षेत्रों में हमारी पहल ने हमारे काम को और बड़े क्षेत्र में फैलाया और ज़रूरी बनाया है।
हमारी तीन ऑपरेटिंग इकाइयों के बारे में और जानें

हमारे फ़ील्ड संस्थान स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका में हमारे ज़मीनी स्तर पर किए जाने वाले काम के पीछे की ताकत है।

हम विकास और मानव कल्याण के मुद्दों से जुड़े कई क्षेत्रों में काम करने वाले गैर-लाभकारी और नागरिक समाज संगठनों की वित्तीय ग्रांट देकर मदद करते हैं।

कौशल व ज्ञान से भरपूर उच्च शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालों की क्षमता बढ़ाने के लिए समर्पित है।
आज हम भारत के सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में ख़ुद काम कर रहे हैं। देश के बाकी हिस्से में हम अपने ग्रांट पार्टनर्स के ज़रिए काम कर रहे हैं।
क्या आप समाज में बदलाव लाना चाहते हैं? हमारे साथ ऐसे अवसरों की तलाश करें।

हमारे साथ काम करने वाले अलग-अलग तरह के और सामाजिक रूप से जागरूक लोगों में शामिल हों
हमारे ज्ञान के ख़जाने में गहराई तक उतरिए

यह बच्चों और/या शिक्षकों के साथ काम करने वालों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिकाएँ हैं।

यह लाइब्रेरियन द्वारा सावधानी से तैयार किया गया, सीखने-सिखाने की सामग्री का संग्रह है।

यह फ़ाउण्डेशन, विश्वविद्यालय और हमारे साथ काम करने वालों के लेखों और पुस्तकों का डिजिटल संग्रह है।

यह विकास, शिक्षा, नीति निर्माण, शासन, सस्टेनब्लिटी और समानता के क्षेत्र से जुड़े अकादमिक रिकॉड्स का बेहतरीन संग्रह है।
लघुचित्र, डायरी, वीडियो, वार्तालाप : इस अनुभाग में बताया गया हर एक काम आपको हमारे काम के बारे में बारीकी से जानकारी देता है

फ्लाई-ओवर और पुलों के नीचे सोते लोग, फ़ुटपाथ पर झुंड में बैठे परिवार, ट्रैफिक सिग्नलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीख मांगते असहाय और बूढ़े लोग; ये सब भारत के मेट्रो शहरों का बेहद आम दृश्य है। ये शहरी बेघर हमारे आस पास ही हैं, लेकिन तेजी से फ़ैलते शहरों में हम उनकी मौजूदगी […]
जानें कि कैसे रमन्ना ने तीन महीने में छात्रों को अँग्रेजी में पूरे आत्मविशास के साथ वार्तालाप करने में मदद की और कैसे उनके स्कूल में और अधिक छात्र आए।
जानें कि लोकेश मणिकांत ( बी ए मानविकी 2020-23) ने निम्न आय वाले समुदाय के कक्षा पाँच के छात्रों के जीवन में सीखने के प्रति उल्लास और उद्देश्य कैसे पैदा किया
क्या हुआ जब छोटे बच्चे लोक संगीतकारों से मिले? जादू
आदिवासी समुदायों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ आम नागरिकों से भी कम पहुँच पाती हैं। इस संवाद हिस्सा लेते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भारत के आदिवासी समुदायों के बीच रहकर काम करने के अनुभवों को साझा किया है।
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