शिक्षा को बेहतर बनाना और उसे सब तक पहुँचना हमारे काम मुख्य मार्गदर्शक बिंदु है
हमने ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले फ़ील्ड संस्थानों की स्थापना की है। हमारे फ़ील्ड संस्थान सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 59 ज़िलों में काम कर रहे हैं। इन ज़िलों के 320 गाँवों में बने हमारी फ़ील्ड संस्थानों में 1,700 से ज़्यादा लोग काम कर रहे हैं। हम देश के 59 ज़िलों में 284 ‘शिक्षक शिक्षा केंद्र’ भी चलाते हैं। हमने पिछले 20 वर्षों में ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले इन संस्थानों की स्थापना की है। इन संस्थानों के ज़रिए हम लगातार ज़मीनी स्तर पर कमज़ोर और वंचित व्यक्तियों तक पहुँचने की कोशिश करते रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए हमें जो अनुभव मिले, उन्हीं अनुभवों के चलते हमने फ़ील्ड संस्थानों की स्थापना करनी शुरु की। वर्ष 2001 में हमने सरकारी स्कूल सिस्टम की मदद से अपने काम की शुरुआत की थी। हमने स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटाने, स्कूलों को सभी के लिए सुरक्षित बनाने और सभी को शिक्षा के समान अवसर मुहैया कराने वाली स्थितियाँ तैयार करने वाले कार्यक्रम बनाने से अपने काम की शुरुआत की थी। लगभग एक दशक तक काम करने के अनुभवों के बाद हमने संस्थानों की स्थापना करने की ज़रूरत महसूस की। इन अनुभवों ने हमें काफ़ी कुछ सिखाया और हमारे नज़रिए में बेहद ज़रूरी बदलाव आए। इसी के तहत हमने फ़ील्ड संस्थानों की स्थापना करने का फ़ैसला लिया। इन्हीं फ़ील्ड संस्थानों के ज़रिए हम अब शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और लाइवलीहुड जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले इन फ़ील्ड संस्थानों के ज़रिए हम स्थानीय समुदाय का हिस्सा बनकर काम करते हैं। इन फ़ील्ड संस्थानों के ज़रिए हमें सही और सटीक तरीके से बेहद ज़रूरी मुद्दों पर लगातार काम करने में मदद मिलती है। हमारी कोशिश है कि हम सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और इन स्कूलों में सभी के लिए बराबर मौके मुहैया कराने में मदद करें। ये फ़ील्ड संस्थान हमारी इन कोशिशों का अहम ज़रिया हैं। शिक्षा में अपने कामों को आगे बढ़ाते हुए हमने अज़ीम प्रेमजी स्कूल की स्थापना की है। ऐसे कुल 9 स्कूल देश के अलग-अलग राज्यों में डेमोनस्ट्रेशन स्कूलों के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
संस्थानों के इस नेटवर्क के ज़रिए हमने अपने काम का दायरा अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ाया है। अब हम स्वास्थ्य (जिसके तहत हम शिशु घर भी चलाते हैं), लाइवलीहुड और युवा सहभागिता जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं। हम ज़्यादातर काम राज्य सरकारों के साथ मिलकर करते हैं, जिसमें हम सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
हमने कोविड-19 के दौरान राहत और टीकाकरण से जुड़े कामों में बड़े पैमाने पर भागीदारी की। इसके बाद 2022 में अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन ने बेंगलूरु की तीन झुग्गी बस्तियों में स्वास्थ्य पहल की शुरुआत की। फिर वर्ष 2023 तक झारखण्ड-छत्तीसगढ़ की सीमाओं के 10 ज़िलों में स्वास्थ्य पहल का काम शुरु कर दिया गया था। इसी साल अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल में पब्लिक हेल्थ विषय में एम.ए. प्रोग्रैम (MPH) की शुरुआत भी की गई।
हम दूर-दराज़ के आदिवासी समुदायों से लेकर शहर से सटी झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले कमज़ोर तबके के लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।
हम लाइवलीहुड यानी आजीविका के क्षेत्र में भी बेहद ज़रूरी काम करते हैं।
हम देश के सबसे कमज़ोर तबकों के परिवारों की आमदनी को न सिर्फ़ बेहतर बनाना चाहते हैं, बल्कि हम उनकी आमदनी को लगातार टिकी रहने वाली बनाने की भी कोशिश करते हैं। इसके लिए हम पहले से चले आ रहे आमदनी के माध्यमों को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही हम मनरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसी सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी मुहैया कराते हैं। हमारी लाइवलीहुड टीम ज़रूरतमंद कमज़ोर तबके के परिवारों की आमदनी बढ़ाने के कई पहलुओं पर काम कर रही है।
हमने लगातार टिके रहने वाला सस्टेनेबल लाइवलीहुड के क्षेत्र में काम करने की शुरुआत 2022 में की थी। इस क्षेत्र में सबसे पहले छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और झारखण्ड के गुमला ज़िले में काम करना शुरु किया था।
अब हम 10 राज्यों में लाइवलीहुड के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिनमें से 7 राज्यों में हमारे फ़ील्ड संस्थान पहले ही मौजूद हैं। हमारा यूनिवर्सिटी रिसोर्स सेंटर वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों के साथ परामर्श कार्यशालाओं से लेकर राज्य बोर्ड परीक्षाओं में सुधार, शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षकों की क्षमता विकास जैसे बेहतर बदलाव लाने वाले काम करता है।
हमारे फ़ील्ड संस्थानों द्वारा किए जाने वाले कार्य:
- शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, पंचायत पदाधिकारियों, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मियों, ब्लॉक व ज़िला स्तर के पदाधिकारियों और राज्य स्तर के प्रशासनिक प्राधिकारियों की क्षमता को बढ़ावा देना।
- सामाजिक कार्य के लिए युवाओं के साथ जुड़ना।
- आजीविका (लाइवलीहुड) पर किसानों, समुदायों और पंचायतों के साथ परियोजनाएँ बनाना।
- शिक्षा में क्लस्टर और ब्लॉक संसाधन केंद्र, ज़िला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (DIET), माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) जैसी संस्थानों को कई तरीकों से मदद करना।
- पाठ्यक्रम और पाठ्य–पुस्तकों का विकास, मूल्यांकन और परीक्षाओं में सुधार तथा नीति का निर्माण करना और उसे लागू करना।
- जिन ज़िलों में हम काम करते हैं, वहाँ के प्राथमिक डेटा का इस्तेमाल करके, हम स्कूली शिक्षा में कुछ प्रमुख मुद्दों पर फ़ील्ड रिसर्च भी करते हैं।
