बदलाव की कहानियाँ

Stories of Change

लघुचित्र, डायरी, वीडियो, बातचीत : इस अनुभाग में बताया गया हर एक काम आपको हमारे और हमारे काम के करीब लाता है। यह हमारे सामने मौजूद चुनौतियाँ बताते हैं, जिन्हें हमने अपने उद्देश्य के करीब आने के लिए पार की हैं

हमारी तीन परिचालन इकाइयाँ हैं – फील्ड संस्थान, फ़िलंथ्रोफ़ी और विश्वविद्यालय। यह तीनों एकजुट तरीके से फ़ाउण्डेशन के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती हैं। एक न्यायसंगत, समतामूलक, मानवीय और सस्टेनबल समाज की दिशा में योगदान देना फ़ाउण्डेशन का उद्देश्य है। हम आपके लिए तीनों इकाइयों से, सीधे भारत भर में हमारे लोगों और भागीदारों से कहानियों का एक संग्रह लाए हैं। कहानियों के इस संग्रह में वीडियो, एनीमेशन, साक्षात्कार और पत्रिकाएँ मौजूद हैं। यह हमारे कार्य के विभिन्न क्षेत्रों में फ़ाउण्डेशन की यात्रा और प्रभाव को प्रदर्शित करती हैं।

youtube play iconआदिवासी समुदायों में स्वास्थ्य को अहमियत देना: आज के हालात और आगे की राह

आदिवासी समुदायों में स्वास्थ्य को अहमियत देना: आज के हालात और आगे की राह

आदिवासी समुदायों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ आम नागरिकों से भी कम पहुँच पाती हैं। इस संवाद हिस्सा लेते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भारत के आदिवासी समुदायों के बीच रहकर काम करने के अनुभवों को साझा किया है।

एक कोशिश
youtube play iconखाना, खेलना और देखभाल: उड़िसा के एक शिशु घर में स्रीमा के साथ एक दिन

खाना, खेलना और देखभाल: उड़िसा के एक शिशु घर में स्रीमा के साथ एक दिन

इस फिल्म में स्रीमा नज़रिए से अज़ीम प्रेमजी शिशु घर में बिताए गए एक दिन को दिखाया गया है। इसमें हम देख सकते हैं कि किस प्रकार बच्चे शिशु घर में एक सुरक्षित और पोषणयुक्त महौल में अपना दिन बिताते हुए साथ मिलकर खेलते-सीखते और पोषणयुक्त स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

एक कोशिश
असुंता दीदी: स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसे को बनाए रखने वाली दीदी (सिस्टर)

असुंता दीदी: स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसे को बनाए रखने वाली दीदी (सिस्टर)

देश के दूर-दराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ संसाधनों से बढ़कर यहाँ के स्वास्थ्य-कर्मियों के अथक प्रयासों एवं विश्वसनीयता के चलते सक्रिय हैं। यह कहानी ऐसे ही विश्वासों को बनाए रखते घटनाओं के साक्ष्य प्रस्तुत करती है।

एक कोशिश
youtube play iconटीकाकरण की सफलता: घरेलू सर्वेक्षण की भूमिका – उत्तराखंड से कोविड-19 की कहानियाँ

टीकाकरण की सफलता: घरेलू सर्वेक्षण की भूमिका – उत्तराखंड से कोविड-19 की कहानियाँ

यह डॉक्युमेंट्री तस्वीरों के ज़रिए आगे बढ़कर पहली पंक्ति में काम करने वाले उत्तराखंड के 24 बहादुर लोगों की कहानी बताती है। इसमें राज्य के टीकाकरण अभियान में हर एक घर तक पहुँचकर टीकाकरण करने वाले लोगों की कहानी बताई गई है। इन लोगों की मेहनत और लगन से किए गए सर्वे के बदौलत राज्य में टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में मदद मिली है।

एक कोशिश
youtube play iconमहिला वैक्सिन वॉरियर: कोविड-19 राजस्थान से कुछ अनुभव

महिला वैक्सिन वॉरियर: कोविड-19 राजस्थान से कुछ अनुभव

यह कोविड-19 के दौरान सबसे आगे की पंक्ति में काम करने वाली 11 महिलाओं की कहानी है। इन महिलाओं ने राजस्थान में टीकाकरण अभियान में बेहद ज़रूरी योगदान दिया। इन फोटो डॉक्यूमेन्ट्री में इन्हीं बहादुर महिलाओं के अनुभव दिखाए गए हैं।

एक कोशिश
youtube play iconमोरी में टीकाकरण अभियान: एक मुश्किल चढ़ाई

मोरी में टीकाकरण अभियान: एक मुश्किल चढ़ाई

हमने भारत में कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के समर्थन में काम किया है। ख़ासतौर पर हमने कुछ दूर-दराज़ और पिछड़े ज़िलों में हम पहले से मौजूद थे, यहाँ काम करना काफ़ी चुनौतियों से भरा था। पेश है उस समय की एक अनकही कहानी:

एक कोशिश
youtube play iconएक डॉक्टर का अनुभव: राजस्थान से COVID-19 कहानियाँ

एक डॉक्टर का अनुभव: राजस्थान से COVID-19 कहानियाँ

यह कहानी "क्रॉनिकलिंग कोविड-19 इन इंडिया" शृंखला का एक हिस्सा है। इसके तहत राजस्थान की कई कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं, जिनमें से यह पहली कहानी है। इसमें नाथद्वारा ज़िला अस्पताल, राजसमंद के डॉ. बीएल जाट की कहानी पेश की गई है:

एक कोशिश
youtube play iconपत्रकारों का अनुभव: राजस्थान से COVID-19 कहानियाँ

पत्रकारों का अनुभव: राजस्थान से COVID-19 कहानियाँ

इस रिपोर्ट में हम देश भर के सभी निडर पत्रकारों और श्मशान घाट पर काम करने वाले लोगों के प्रति आदर व्यक्त कर रहे हैं।

एक कोशिश
youtube play iconभारत में COVID-19 का इतिहास | कलबुर्गी की कहानी

भारत में COVID-19 का इतिहास | कलबुर्गी की कहानी

यह तस्वीर कर्नाटक के कलबुर्गी ज़िले की फोटो द्वारा कहानियों में से पहली है: मानवीय संकट, तबाही और अत्यंत जुझारू प्रतिक्रिया।

एक कोशिश
© 2026 अजीम प्रेमजी फाउंडेशन. सर्वाधिकार सुरक्षित।
© 2026 अजीम प्रेमजी फाउंडेशन. सर्वाधिकार सुरक्षित।