पाठशाला भीतर और बाहर (Paathshaala Bhitar Aur Bahar)

August, 2019

पाठशाला भीत र बाहर का पहला अंक गए साल बारिश के ऐसे ही मौसम में छपकर आया था और ज्ञान परम्प रा के साथ कदमताल का यह सि लसि ला जारी है। शो ध पत्रिका के प्रस्तुत अंक को अन्ति म रूप देने के इस मसरूफ़ वक्त में बीच–बीच में बारिश ने कहीं मौसम को खुशनुमा बनाया है तो कहीं बाढ़ और तबाही का सि लसि ला पैदा किय ा। इस सबके बीच नए संकल्पों के साथ पत्रिका का यह ती सरा अंक आपके सामने है। यह सुखद है कि पि छले अंकों की तरह इसमें भी बहुत सारे नए लेखकों ने आमद दी है, जोकि इस प्रकाशन का एक बड़ा मक़सद है।

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पाठशाला भीतर और बाहर (Paathshaala Bhitar Aur Bahar)

february, 2019

पाठशाला भीतर और बाहर का द ूसरा अंक आपके सामने है। हमारे लि ए सबसे महत्त्वप ूर्ण प हलू यह है कि इस अंक के लि ए और कुछ नए लेखक मि ले। इनमें से बहुत से नए शोधकर्ता हैं और कई शिक्ष क भी हैं। हि न्दी व अन्य भारतीय भाषाओं में इस त रह के प्रयास न सिर्फ़ नए अनुभवों व उनके वि श्ले षण को सामने लाते हैं वरन् स् कूलों में व अन्य स्थलों प र कार्य करने वालों को अपने कार्य प र मनन करने व उस प र अन्य लोगों की टिप्प णी व प्रतिक्रिया जानने का मंच भी प्रदान करते हैं। भारतीय भाषाओं में लि ख प ाने की स्वा भावि कता...read more

पाठशाला भीतर और बाहर (Paathshaala Bhitar Aur Bahar)

July, 2018

.....शिक्षा को लेकर हो रहे सोच-विचार में ज्यादा से ज्यादा लोग.....सब के लिए शिक्षा पर हो रही बहस में ज्यादा भागीदारी.....स्कूलों व् कक्षाओं में छात्रों व् शिक्षकों के आपसी व्यवहार व् शिक्षण के तरीकों में बदलाव.....पत्रिका का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों......क्या शिक्षक एक पेशेवर है?.....क्या एक अच्छी कक्षा , गणित की सफल कक्षा भी कही.....आखिर संवाद कैसे शुरू.....